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Cirrhosis

लीवर के. परमानेंट डैमेज को सिरोसिस कहते हैं I भारत में लिवर के मरीज बढ़ते जा रहे हैं बल्कि पश्चिमी देशों और चीन में लीवर की बीमारियां कम होती जा रही है I कारण अत्यधिक अल्कोहल का सेवन, हेपेटाइटिस बी और सी जैसे वायरल इनफेक्शन, फैटी लीवर ,शरीर में आयरन या कॉपर की मात्रा बढ़ जाना, ऑटोइम्यून लीवर की बीमारियां, लीवर की हैपेटिक vein में खून का थक्का जम जाना लक्षण शुरुआत में बीमारी के कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन बाद में कमजोरी, आंखों में पीलापन, पेट में पानी भरना, बेहोशी जैसी स्थिति होना, पैरों में सूजन, भूख नहीं लगना, वजन कम होना,  खाने की नली की नसें फूलना, खून की उल्टी होना या लैट्रिन में खून के लक्षण होते हैं रोकथाम बच्चों में हेपेटाइटिस A और B का और एडल्ट में हेपेटाइटिस B का वैक्सीनेशन करना चाहिए खाना खाने से पहले हाथ साबुन से साफ करें I मोटापा ना होने दें वजन कम करें I शुगर और कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कंट्रोल रखें I अल्कोहल ना ले I उपचार अपने डॉक्टर से सलाह लें

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hematemesis

शराब पीने के बाद खून की उल्टी (हेमेटेमेसिस) होना एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हैI खून की उल्टी के मुख्य कारण: मैलोरी–वीइस टियर (Mallory-Weiss Tears):  बहुत ज़्यादा और ज़ोरदार उल्टी करने से ग्रासनली(Oesophagus) के निचले हिस्से में चीरा लग जाता है, जिससे चमकदार लाल खून आ सकता है। एसोफेजियल वैरिसेस (Esophageal Varices):  लंबे समय तक शराब पीने से लिवर खराब (सिरोसिस) हो जाता है, जिससे लिवर में खून का बहाव रुक जाता है। यह ग्रासनली की नसों में दबाव बढ़ाकर सूजन पैदा कर देती है, जो फटकर खून बहने का कारण बन सकती हैं। अल्कोहलिक गैस्ट्राइटिस (Alcoholic Gastritis):  शराब पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुँचाती है, जिससे सूजन और एसिड बनता है और रक्तस्राव हो सकता है। अल्सर अत्यधिक शराब शरीर के पाचन तंत्र को इतना नुकसान पहुँचाती है कि अल्सर बन जाता है और रक्त वाहिकाएँ फट सकती हैं। आपको क्या करना चाहिए: खून की उल्टी (उल्टी का रंग लाल, कॉफी जैसा या काला) एक मेडिकल इमरजेंसी है। देर न करें, तुरंत डॉक्टर के पास या अस्पताल जाएँ। कारण देखने के लिए एंडोस्कोपी की जाती है और रक्तस्राव (bleeding) को रोका जाता हैI यह स्थिति शराब के सेवन से जुड़ी है, इसलिए इसे तुरंत बंद करना ज़रूरी है।  

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Constipation

कब्ज़ क्या है ? प्रति सप्ताह तीन से कम बार मल त्याग होना मल की छोटी, सख्त, सूखी मात्रा जिसे निकालने में कठिनाई या दर्द होता है। मल त्याग करने के लिए अत्यधिक जोर लगाने की आवश्यकता   कब्ज के कारण फाइबर युक्त भोजन न करना पर्याप्त नींद न सोना जरूरत से कम खाना शरीर में पानी की कमी होना शारीरिक श्रम न करना कुछ दवाओं’ का सेवन जैसे पेनकिलर, आयरन टेबल्स, डिप्रेशन की दवाएं भोजन बिना चबाएं खाना चाय, कॉफी बहुत ज्यादा पीना धूम्रपान करना व शराब पीना ज्यादा उपवास करना थायरॉयड हार्मोन का कम बनना शरीर में कैल्सियम और पोटैशियम की मात्रा कम होना गरिष्ठ पदार्थों का सेवन करना यूरिन को अधिक समय तक रोके रखना शौच करने की इच्छा को अनदेखा करना या उसमें देरी करना कोलोरेक्टल कैंसर गर्भावस्था कब्ज के नुकसान – बवासीर, भगंदर, फिशर रोग होने की संभावना बढ़ जाना

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Liver

आपकी त्वचा वो बता सकती है जो आपका लिवर नहीं कह पा रहा। लिवर की बीमारी अक्सर त्वचा पर दिखती है। 🔍 इन लक्षणों पर ध्यान दें: आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (JAUNDICE)) हथेलियों का लाल होना (PALMER ERYTHEMA) मकड़ी जैसे रक्त वाहिकाएं (SPIDER NAVI) त्वचा में खुजली (PRURITIS) सफेद नाखून जिनके सिरे पर गुलाबी पट्टी हो (TERRY’S NAILS)) त्वचा पर छोटी, पतली blood vessels दिखाई देती हैं, जो डॉलर के नोटों में पाए जाने वाले लाल- नीले रेशमी धागों के समान होती हैं (PAPER MONEY SKIN)  उंगलियों और नाखूनों का आकार बढ़ जाता है और वे मुड़ जाते हैं (CLUBBING) बगल के बालों का झड़ना (AXILLURY HAIRS LOSS) लड़कों और पुरुषों में स्तन ग्रंथि TISSUE बढ़ जाना (GYNECOMASTIA) हथेली की त्वचा के नीचे के ऊतक मोटे जो उंगलियों को स्थायी रूप से हथेली की ओर मोड़ देती हैं (ALCOHOLIC DUPUYTREN’S CONTRACTURE) चेहरे का फैट खत्म हो जाना (FACIAL LIPODYSTROPHY) पेट में पानी भरकर  फूल जाना (ASCITIES) चेहरे पर दोनों तरफ की लार ग्रंथि बढ़ जाना (PAROTID GLAND ENLARGEMENT) समय पर पहचान ज़रूरी है। ऐसे लक्षण दिखें तो लिवर विशेषज्ञ से संपर्क करें। 📢 इस पोस्ट को शेयर करें—शायद किसी की ज़िंदगी बदल जाए।

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intestinal gas (flatus)

आंत्र गैस (फ़्लैटस) – आंतों में खाने के पाचन से सामान्य तौर गैस बनती ही है I यह पाचन का एक सामान्य हिस्सा है I कुछ गैस फ़्लैटस () के माध्यम से बाहर आ जाती है कुछ गैस फंस जाती है, जिससे असुविधा और दर्द होता है। आंतों में गैस के कारण:    हवा निगलना: बहुत जल्दी-जल्दी खाना या पीना, च्युइंग गम चबाना या धूम्रपान करने  में अधिक हवा निगलना किण्वन: बड़ी आंतों में मौजूद बैक्टीरिया अपचित कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर हाइड्रोजन, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें उत्पन्न करते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ: कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे बीन्स, ब्रोकोली और डेयरी उत्पाद, डाइट में फाइबर का ज्यादा उपयोग I पाचन विकार: चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस), सीलिएक रोग (गेहूं से एलर्जी) या लैक्टोज Intolerance (दूध से एलर्जी) I कब्ज़: बड़ी आंत में मल ज्यादा समय तक पड़े रहने के कारण फर्मेंटेशन से गैस ज्यादा बनती है I आंतों की गैस से राहत और रोकथाम:    आहार में परिवर्तन:  एक बार में थोड़ा-थोड़ा खाना, खाना धीरे-धीरे खाना, भोजन को अच्छी तरह चबाना,  गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना,  धूम्रपान से बचना और नियमित व्यायाम करना, कम FODMAP वाली डाइट का उपयोग  

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INTERNAL HEMORRHOIDS

आंतरिक बवासीर (INTERNAL HEMORRHOIDS) दर्द रहित रक्तस्राव (PAINLESS BLEEDING) सबसे आम लक्षण है, जो अक्सर टॉयलेट  pot में  या मल को कोटिंग करते हुए red blood के रूप में दिखाई देता है। प्रोलैप्स्ड बवासीर: बवासीर गुदा से बाहर आती है जिससे दर्द,  और जलन हो सकती है। गुदा के आसपास खुजली, जलन या एक कठोर गांठ हो सकती है।   बाहरी बवासीर (EXTERNAL HEMORRHOIDS) गुदा के पास एक दर्दनाक कठोर गांठ या सूजन महसूस हो सकती है. गुदा के आस-पास का क्षेत्र खुजली दर्द का अनुभव हो सकता है मल में चमकदार लाल रक्त दिखाई दे सकता है। थ्रोम्बोस्ड बवासीर: यदि बवासीर में रक्त का थक्का बनता है, तो यह बहुत दर्दनाक हो सकता है और एक नीली गांठ के रूप में दिखाई दे सकता है। गुदा विदर (ANAL FISSURE) मल त्याग के दौरान और बाद में तेज जलन वाला दर्द। मल त्याग के बाद दर्द कई मिनट से लेकर कई घंटों तक रह सकता है। मल त्याग के बाद मल या टॉयलेट पेपर पर चमकीला लाल रक्त दिखाई देना। भगंदर (FISTULA IN ANO) गुदा फिस्टुला के लक्षणों में गुदा के आसपास दर्द और सूजन, मवाद या रक्त का रिसाव, त्वचा में जलन, तथा कुछ मामलों में मल त्याग को नियंत्रित करने में कठिनाई हो सकती है।

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Ulcerative colitis

अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative colitis, IBD) इस बीमारी में बड़ी आंत में अल्सर बन जाते हैं जो लंबे समय तक रहते हैं I लक्षण इस बीमारी में खूनी दस्त होते हैं और motion जाने की बार-बार इच्छा होती है पेट दर्द रहता है और लैट्रिन से खून और म्यूकस आता हैI यह लक्षण लंबे समय तक चलते रहते हैं और मरीज पाइल्स की बीमारी समझ के Ignore कर देता हैI यह बीमारी क्वालिटी आफ लाइफ को खराब कर देती हैI थकान, भूख न लगना और वजन कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस बीमारी में कोलोन कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं कारण यद्यपि अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि  genetic और  environmental factor अल्सरेटिव कोलाइटिस में भूमिका निभाते हैं। इस बीमारी में इम्यून सिस्टम डिस्टर्ब हो जाता है (Autoimmune disease)I इलाज UC के उपचार में आमतौर पर या तो दवा या सर्जरी शामिल होती है। UC के उपचार में कई प्रकार की दवाएँ प्रभावी हो सकती हैं। आप जो दवा लेते हैं वह आपकी स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है।

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IBS

आईबीएस एक लंबी चलने वाली बीमारी है जो आमतौर पर  पेट दर्द के साथ कब्ज, दस्त या दोनों के कांबिनेशन से पैदा होती है   लक्षण: पेट में दर्द और ऐंठन, मल त्याग की आदतों में परिवर्तन, सूजन और गैस, पेट पूरी तरह से साफ न होने का एहसास होना, पेट साफ होने पर दर्द कम हो जाना   कारण: यद्यपि IBS का सटीक कारण पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है, यह कुछ कारण हो सकते हैं ब्रेन गट   एक्सेस डिस्टर्ब होना ब्रेन, तनाव और चिंता, पारिवारिक इतिहास, आंतों में इन्फेक्शन की हिस्ट्री होना   उपचार आहार में संशोधन: उत्तेजक खाद्य पदार्थों से बचना, कम FODMAP आहार का पालन करना, तथा फाइबर का सेवन बढ़ाना , तनाव प्रबंधन: विश्राम व्यायाम, योग और ध्यान, नियमित व्यायाम दवाएं: अपने डॉक्टर से पूछ कर ले

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hepatitis

हेपेटाइटिस हेपा मतलब लीवर टाइटस मतलब इन्फेक्शन, लीवर के इंफेक्शन को हेपेटाइटिस बोलते हैं अगर लीवर में वायरस का इंफेक्शन होता है उसे वायरल हेपिटाइटिस बोलते हैंI वायरल हेपेटाइटिस के मुख्य कारण वायरस A, B, C और E  होते हैंi हेपेटाइटिस A और E अक्सर Infected food and water से फैलता है, जबकि हेपेटाइटिस बी और सी Infected blood के संपर्क,  असुरक्षित यौन संबंध, इनफेक्टेड नीडल्स  share करना या संक्रमित माँ से बच्चे को जन्म से फैलता है। हेपेटाइटिस दो तरह की होती है Acute hepatitis (बीमारी की duration <6 महीना)– मुख्य लक्षण थकान, पेट में दर्द, मतली, उल्टी, भूख न लगना, गहरे रंग का मूत्र, पीला मल और पीलिया (त्वचा और आँखों का पीला पड़ना) I चारों वायरस Acute हेपिटाइटिस करते हैंI Chronic hepatitis (बीमारी की duration >6 महीना )- लक्षण कई सालों तक दिखाई नहीं देते हैं, और जब दिखाई देते हैं तब लीवर खराब हो चुका होता हैI पेट में पानी भरना, पैरों में सूजन, दिमागी संतुलन बिगड़ना, उल्टी में खून आना, लैट्रिन काले रंग की होना, भूख न लगना, पीलिया और खुजली – यह सिरोसिस के लक्षण हैI हेपेटाइटिस B और C Chronic हेपिटाइटिस करते हैं हेपेटाइटिस की रोकथाम टीकाकरण: -हेपेटाइटिस A और B के टीके इन वायरस के खिलाफ सबसे प्रभावी बचाव हैं. ये टीके सभी उम्र के लोगों को दिए जा सकते हैंI असुरक्षित यौन संबंध से बचने के लिए कंडोम का उपयोग करेंI सुइयों और इंजेक्शन का पुनः उपयोग न करेंI संक्रमित व्यक्ति की व्यक्तिगत वस्तुओं (रेजर, टूथब्रश, नेल क्लिपर) का उपयोग न करेंI भोजन को छूने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद अपने हाथों को साबुन और पानी से धोएंI हेपेटाइटिस C और E के लिए कोई टीका नहीं हैI  

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GERD

गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (GERD) एक बीमारी  है इस रोग में एसिड और भोजन वापस Esophagus में आ जाते हैं लक्षण सीने में जलन, उल्टी, सीने में दर्द, निगलने में कठिनाई, खांसी कारण कमजोर या Damaged निचला एसोफैजियल स्फिंक्टर (LES), मोटापा,  गर्भावस्था, कुछ दवाएं, धूम्रपान complications एसोफैजियल अल्सर, एसोफैजियल सिकुड़न, cancer उपचार वजन कम करना थोड़े-थोड़े समय पर खाना ऐसे खाद्य पदार्थों से बचना जो सीने में जलन पैदा करते हैं अपने बिस्तर का सिर ऊंचा रखना अपने पेट के चारों ओर तंग कपड़े पहनने से बचना शराब और तंबाकू से बचना खाने और सोने के बीच कम से कम दो से तीन घंटे का अंतर रखना दवाएँ – दवाई लेने से पहले डॉक्टर से ज़रूर पूछना चाहिए। उनसे दवा के नाम, खुराक, उपयोग और संभावित साइड इफेक्ट्स के बारे में पूछना चाहिए      

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